Live Wire News literary portal with Gulmohar and Rajnigandha flowers
गमले में खिले पीले गेंदे के फूल और प्रेम की प्रतीकात्मक हिंदी कविता

जैसा मैंने सोचा था…

कुछ मोहब्बतें फूलों की तरह होती हैं. मुरझा जाती हैं, मगर उनके भीतर एक बीज बचा रहता है. वक्त और इंतज़ार के बाद वही प्रेम फिर किसी सुबह खिल उठता है.

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मुर्दों की सभा में कर्मों का हिसाब दिखाती हिंदी कविता

 “मुर्दों की हुई सभा”

अगर मृत्यु के बाद इंसान अपने जीवन का हिसाब खुद देख सके, तो उसके पास क्या बचेगा—धन, दौलत, रिश्ते या केवल कर्म? “मुर्दों की हुई सभा” इसी सवाल के माध्यम से जीवन का गहरा सच सामने रखती है।

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सगवाली में LPG सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम,

 एक छोटी सावधानी, बड़े हादसे से बचाव

सगवाली में इंडियन ऑयल के “प्रेरणा अभियान” के तहत LPG सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. ग्रामीण महिलाओं को गैस के सुरक्षित उपयोग, सुरक्षा उपकरणों और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जानकारी दी गई.

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मंत्री के स्वागत में जुटी कॉलोनी और लोकतंत्र पर राजनीतिक व्यंग्य

मंत्री आईं तो बन गईं देवी ! 

मंत्री के दस मिनट के दौरे के लिए पंडाल, कारपेट, भजन, जय-जयकार और मिठाई तक. इस व्यंग्य में एक बच्चे का मासूम सवाल लोकतंत्र में जनता की भूमिका और राजनीतिक चेतना की पूरी कहानी सामने रख देता है।

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दो नैतिकताएँ: रिश्तों में स्त्री-पुरुष के दोहरे चरित्र की पड़ताल

चरित्र का तराजू

जब एक ही रिश्ते में पुरुष की आज़ादी को अधिकार और स्त्री की आज़ादी को चरित्र का सवाल बना दिया जाए, तो समस्या सिर्फ रिश्ते में नहीं, बल्कि उस सोच में होती है जो दोनों के लिए अलग-अलग नैतिकता तय करती है।

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मुंबई की चॉल की खिड़की के पास किताब पढ़ती महिला, संघर्ष से सफलता की प्रेरक कहानी

पन्नों से परवाज़ तक

लालटेन की रोशनी में शुरू हुआ पढ़ाई का सफर मुंबई की चॉल की छोटी-सी खिड़की तक पहुँचा. जिम्मेदारियों के बीच भी उजाला ने सीखना नहीं छोड़ा और अपने सपनों को हकीकत में बदलकर दूसरों के लिए प्रेरणा बन गई.

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आधुनिक भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव से दूर परिवार के साथ समय बिताता व्यक्ति

दौड़ते-दौड़ते कहीं ज़िंदगी पीछे न छूट जाए

प्रतिस्पर्धा, पैसा कमाने की होड़ और डिजिटल दुनिया ने इंसान को अपनों से दूर कर दिया है. ऐसे में जरूरी है कि हम भागती जिंदगी से थोड़ा वक्त निकालें, रिश्तों को समय दें और तनाव के बजाय सुकून को चुनें.

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शाम के समय झील के किनारे टहलती महिला और दूर खड़ा एक प्रेमी जोड़ा

 झील के किनारे

झील के किनारे रोज़ प्रेमी जोड़ों को देखकर लगता था कि यहाँ सिर्फ नई जोड़ियाँ बनती हैं. लेकिन एक शाम सुनी गई बातचीत ने एहसास कराया कि कुछ रिश्ते जहाँ शुरू होते हैं, वहीं कुछ बसी-बसाई गृहस्थियाँ भी टूटने लगती हैं.

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खिड़की के पास कॉफी के साथ चुप्पे प्रेम को महसूस करती महिला

चुप्पा प्रेम

कुछ प्रेम साथ रहने की ज़िद नहीं करते, अधिकार नहीं जताते और बार-बार अपने होने का एहसास भी नहीं कराते. वे बस आपकी छोटी-छोटी बातें याद रखते हैं. विक्रांत का प्रेम भी कुछ ऐसा ही था—खामोश, बिना दिखावे का और बेहद अपना.

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पुराना डाक बंगला और उसके बरामदे से बदलते कस्बे की कहानी

36 शख्स… 36 कहानियां

एक बूढ़ा डाक बंगला अपनी आंखों से देखे कस्बे के बदलते समय, लोगों, रिश्तों और भूली-बिसरी यादों की खट्टी-मीठी कहानियां सुनाता है. पढ़िए 36 शख्स… 36 कहानियां.

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