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दैनिक भास्कर में संपादक और रिपोर्टर के बीच संवाद को दर्शाता पुराने हिंदी समाचार कक्ष का दृश्य

मुन्ना से कीर्ति राणा

दैनिक भास्कर में बिताए वर्षों की कुछ यादें ऐसी हैं, जो एक संपादक के व्यक्तित्व के कई पहलुओं को सामने लाती हैं। श्रवण गर्ग के साथ खबरों पर तीखी बहस, रिपोर्टर की बेबाकी, कर्मचारियों के प्रति संवेदनशीलता और नाग-कोबरा वाला वह मजेदार प्रसंग न्यूज़रूम की एक अलग ही तस्वीर पेश करता है।

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अकेलेपन में पुरानी प्रेम यादों में खोया एक व्यक्ति

राख में भी तेरा आशियाना

कुछ रिश्ते ख़त्म होकर भी दिल से ख़त्म नहीं होते। उनकी यादें, उनकी ख़ुशबू और उनसे जुड़े सवाल बरसों बाद भी मन में बने रहते हैं। यह ग़ज़ल बिछड़ने के बाद भी प्रेम के शेष रह जाने और यादों के लगातार रिसते घावों की दास्तान है।

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एक-दूसरे की भावनाओं और इच्छाओं को समझते दो लोग

प्रेम में ‘मैं’ नहीं, ‘तुम’ भी ज़रूरी

हर रिश्ते में हम अपनी पसंद और इच्छाओं की बात करते हैं, लेकिन क्या कभी सामने वाले की चाहत के बारे में सोचते हैं? प्रेम और अपनापन तभी गहरा होता है, जब ‘मैं’ के साथ ‘तुम’ को भी बराबर जगह मिलती है।

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दादी के आँचल का सिरा पकड़े पार्क में चलती छोटी पोती

दादी का आँचल

अमिता श्रीवास्तव “दादी, हाथ कहाँ पोंछूँ?” मॉल के फूड कोर्ट में वॉफल खाकर चॉकलेट से सनी अपनी नन्हीं हथेलियाँ लिए अंबू मेरे सामने खड़ी थी। पाँच साल की अंबिका मेरी अंबू थी। “रुको, अभी रूमाल देती हूँ।” कहकर जैसे ही मैं अपना पर्स खोलने चली, उसने झट मेरे आँचल में अपनी हथेलियाँ पोंछ लीं। क्रीम…

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खिड़की के पास खड़ी दूरियों और अधूरे प्रेम में खोई एक स्त्री

मेरे साजन हैं उस पार…

कुछ दूरियाँ इतनी छोटी होती हैं कि उन्हें हथेलियों से मापा जा सकता है, लेकिन कुछ दूरियाँ उम्र भर समाप्त नहीं होतीं। ‘मेरे साजन हैं उस पार…’ अनकहे प्रेम, बिछोह, यादों और मन में रह गए अधूरे इंतज़ार की मार्मिक अभिव्यक्ति है।

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सफेद साड़ी पहने तुलसी के पास दीप जलाती एक विधवा स्त्री

प्यार के रंग

क्या जीवनसाथी के जाने के बाद प्रेम का रंग बदल जाता है? अमिता कर की रचना ‘प्यार के रंग’ एक ऐसी स्त्री के मन की संवेदनाओं को अभिव्यक्त करती है, जिसके लिए पति की अनुपस्थिति में भी प्रेम, आस्था और समर्पण पहले जैसे ही हैं। बदलता है तो सिर्फ पहनावा, प्रेम नहीं।

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वीडियो कॉल पर चार बेटियों को देखकर भावुक होते भारतीय पिता

खाली हाथ

चार बहनों की वीडियो कॉल ने बचपन की यादें ताज़ा कर दीं। हँसी-मज़ाक और पुरानी बातों के बीच पिता के आँसू सबको भावुक कर गए। ‘खाली हाथ’ रिश्तों की दूरी और अपनों के साथ की अधूरी चाहत को बयां करती एक मार्मिक कहानी है।

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कैफे में बातचीत करते दो वयस्क, आधुनिक डेटिंग और रिश्तों की बदलती अवधारणा का प्रतीकात्मक दृश्य

प्यार, पैसा और पार्टनर

ऑनलाइन डेटिंग के दौर में शुगर बेबी और शुगर डैडी जैसे रिश्ते चर्चा में हैं। जानिए इनका अर्थ, लोकप्रियता के संभावित कारण और आर्थिक व भावनात्मक जोखिम।

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वर्ष 2001 के आसपास अखबार के दफ्तर में तबादले का आदेश पढ़ता पत्रकार

मुन्ना से कीर्ति राणा

साल 2001 के आसपास दैनिक भास्कर में इंदौर से उज्जैन तबादले का यह संस्मरण पत्रकारिता के एक महत्वपूर्ण दौर की यादें समेटे है। कीर्ति राणा और शशींद्र जलधारी के पेशेवर संबंधों, संपादकीय घटनाक्रम, अखबारी राजनीति और परिवार के साथ लिए गए कठिन फैसले की यह कहानी बताती है कि एक आदेश किस तरह जिंदगी की दिशा बदल सकता है।

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विजयादशमी पर जलते रावण के पुतले के सामने आत्ममंथन करता व्यक्ति

जलते पुतले, बढ़ते रावण

विजयादशमी केवल रावण का पुतला जलाने का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों को पहचानने और उन्हें दूर करने का अवसर भी है। यह कविता लोभ, अहंकार, छल, अन्याय और टूटते विश्वास पर सवाल उठाते हुए सच्चे विजयादशमी पर्व का अर्थ समझाती है। संदेश स्पष्ट है जब तक मन का रावण जीवित है, तब तक वास्तविक विजय अधूरी है।

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